शिक्षक दिवस और प्रश्न ( लघुकथा ) - by Chandan Keshri ( चन्दन केशरी )
शिक्षक दिवस और प्रश्न - शिक्षक दिवस आने में अभी एक सप्ताह का समय शेष था, लेकिन बच्चों ने इसकी तैयारियाँ आरंभ कर दी थी। विद्यालय से घर आ...
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शिक्षक दिवस और प्रश्न - शिक्षक दिवस आने में अभी एक सप्ताह का समय शेष था, लेकिन बच्चों ने इसकी तैयारियाँ आरंभ कर दी थी। विद्यालय से घर आ...
मत मारो मुझपर कुल्हाड़ी - बेजुबान वृक्ष पर भी, स्वार्थ की उठी कुल्हाड़ी, पेड़ भी तब बोल पड़ा, सुनो बात सब नर-नारी। मुझसे ही है जीवन तेरा, मुझसे ...
धरती माता की चित्कार - धरती माता की संतानों, धरती माता रही पुकार। सहन नहीं कर पाओगे तुम, धरती माता की चित्कार।। पेड़ों को यूँ काटा तुमने, अपन...
छठ महापर्व - पर्व तो हमारे सनातन धर्म में बहुत से हैं, लेकिन छठ पूजा तो हमारे लिए महापर्व है। आखिर ऐसी क्या विशेषता है छठ पूजा में, जिसके का...
जो फूल खिला गए शाखों पर - थे लाल बहादुर शास्त्री जी वो, जो फूल खिला गए शाखों पर। 2 अक्टूबर 1904 को जन्मे वो भारत धरा पर स्वर्ग लाने को, देश ...
माँ ने मेरा एक स्वेटर बुना था - माँ ने मुझे मुझमें मुझसे बेहतर चुना था। हाँ ! माँ ने मेरा एक स्वेटर बुना था।। वो अंगुलियों के बिलांग से...
रहमत - प्रभु मुझको कहाँ है भेजा, अचरज भरा संसार है तेरा। गर्भ में पहले बंद रखा, आज़ाद कर दुनिया में भेजा। नन्हा, अनभिज्ञ मैं प्राणी हूँ, त...
क्षितिज पर मधुर मिलन संगीत - क्षितिज पर मधुर मिलन संगीत। उत्सव-सा नंदन कानन में ।। मादकता वसुधा के तन में । किस यौवन की दिव्यकिरण से खिली ...
घड़ी का काँटा, जीवन से नाता - चुभते हैं पल-पल क्यों काँटे भागते तेज़ निरंतर, दीवाल पर बरसों से टंगी टिक-टिक करती घड़ी के। है पुरानी फिर भी सटी...
प्रेम का बंधन - बिन देखे बिन छुए भी महसूस किया था तुमने मुझे, क्या यही प्रेम का बंधन है या फिर स्पर्श और आलिंगन। छूकर देखूँ तुम्हें बार-बार ...
मन की आस - ढलता जीवन, देखो कैसी आस लगाए, अपनों से, बिन माली के,बगिया कैसी नीर बहाए, नयनों से । क्या खोया है और क्या पाया जीवन आनी-जानी माया...
दुनिया दीवानी हुई - वो गुलामी की बातें पुरानी हुई, अब तो दुनिया हमारी दीवानी हुई, देश सबसे अनोखा है ये विश्व में, हर ऋतु की यहाँ आग...
(1) मैं भारतीय हूँ - गर्व से कहता हूँ, मैं भारतीय हूँ। वेदों की धरती पर, वेदान्त अनुरागी हूँ। गर्व से कहता हूँ, मैं भारतीय हूँ। जीवन को, आलौ...
जाँनिसार बाक़ी है - ये दिले बेक़रार बाक़ी है। जिंदगी का ख़ुमार बाक़ी है। जुस्तजू कैसी, आईना कैसा, अब भी दीदार-ए-यार बाक़ी है। मैन...
आजादी - भारत माँ के वीर सपूतों, धन्य तुम्हारी छाती है। प्राणों का बलिदान कर गए, याद तुम्हारी आती है।। जो आजादी आप दे गए, उसका मिलना मुश्किल ...
बदलता है वर्तमान - किया नहीं जा सकता किसी का मूल्यांकन उसके वर्तमान से, प्राप्त नहीं हो सकता सत्य केवल अनुमान से। परिवर्तन है नियम प्र...
एक सलाम - एक सलाम उन्हें जो वतन पर जिए, एक सलाम उन्हें जो वतन पर मरे। हम जिए तो जिए क्या खाक जिए, हम मरे तो मरे क्या खाक मरे। एक सलाम..... क...
दोस्तों को सुबह सलाम किया - दोस्तों को सुबह सलाम किया। रोज कुछ वक़्त रब के नाम किया। बात झूठी कभी नहीं कहता, माल बाजार एक दाम किया। मुफलिसी द...
बदलते रिश्ते - बदला मौसम भीगा यह मन, सच्चे रिश्ते खोजे हर जन। बचपन बीता बदले सपने, दूर हुए सब साथी अपने। मिट्टी से सुगंध थी आती, स्नेह भरी ब...
प्रभात - पूर्वांचल, सौम्य, शान्त अनुरंजित उदयाचल रवि रहित ज्योत्सना ज्योतित पृथ्वी हो रही है प्रस्तुत धीरे-धीरे दिनकर के स्वागत हेतु प्रथम प...