सिला - by Dr. Shaheda
सिला - अश्कों से तर वरक़, लफ्ज़ भीगते रह गये, क़तरा क़तरा उसे लहू से, सींचते रह गये। मुट्ठी से रेत सा फिसलता जहाँ चला गया, वक्त तेज़ी से गु...
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सिला - अश्कों से तर वरक़, लफ्ज़ भीगते रह गये, क़तरा क़तरा उसे लहू से, सींचते रह गये। मुट्ठी से रेत सा फिसलता जहाँ चला गया, वक्त तेज़ी से गु...
बात - बात लगती है नशतर की तरह, जख्म देती हैं ख़ंजर की तरह । ज़ुबां शीरीं अगर चे होती है, सुनने वाले को सुकून देती है । ये अगर तल्ख़ और कड़...
परेशां जिंदगी - ऐ जिंदगी कर ले कितना भी परेशां तू कि टूट जाएँ हम अगर सोचती हो ऐसा तो गलत सोचती हो तुम चाहे आ जाएँ जीवन मे तूफां ना डगमगायें...
दूरियाँ - कौन कहता है दूरियाँ, दूरी बढ़ाती है, हमसे पूछे जनाब ये हमें और करीब लाती है। मीलों दूर होकर पास होने का एहसास, अलग-अलग रह कर भी रह...
महल बस अपनी गाते हैं - झोपड़ियों के रक्त बहाकर महल बनाते हैं, कौन दर्द समझेगा इनकी क्यूँ अश्रु बनाते हैं, झोपड़ियों की कौन सुने ये कब कह ...
दर्द बिछोह का - बह रही शीतल मंद बयार, प्रीत का छेड़ रही है तार। हृदय में शूल-सा चुभता है, भीतर कुछ टूट चटकता है। जब दर्द बिछोह का उठता है, ...
हसरतें - चाँद उतरा करे गोद में नीर के, हम खड़े ही खड़े बस निहारा करें। वो मचलता रहे ख़ुद बहलता रहे, हम पलकों पे आँसुओं को सँवारा करें। ज्वार ...
मजदूर मैं मजदूर हूँ मैं मजदूर, अपने पेट पालने को हूँ मैं मजबूर। शिला तोड़ता, बंजर खोदता, राह बनाने में हूँ मैं मशगूल, मैं मजदूर हूँ मैं मजदूर...
आँख पत्थर बनी है नम कर दे आँख पत्थर बनी है नम कर दे। मेरे जीवन से कम ये ग़म कर दे। है उजालों से दूरियाँ मेरी, दिल के ज़ज्बात भी खतम कर दे। इन ...
गंगा की पीड़ा यातनाएँ कब तलक चलती रहेंगी संग हमारे। चल कर नही पहुँचे ,लाए गए हैं गंगा किनारे। जीवन भर का सुख दुख मौत झाँक रही थी आँखों में...
जब टूटता है रिश्ता स्मृतियों की हवा जब चलती, राख आशाओं की ही मिलती। अंतस अंगीठी सा सुलगता, किसी से जब टूटता है रिश्ता। अनवरत अश्रुधार है बहत...
अच्छा नहीं किया बेबात ख़फ़ा हो गये तुम अच्छा नहीं किया । मुँह मोड़कर चले गये तुम अच्छा नहीं किया ।। हर वक्त खेलते रहते थे मेरे जज़्बात से ...
सिर्फ यादें --- जबसे मिला है तुम्हारा शोक संदेश, न थम रही आँखों में आँसुओं का रेस। पर्यावरण के रक्षक तुम पौधों के रखवाले, तुम यादें और सिर्फ...