जब टूटता है रिश्ता - by Ashima Varshney


जब टूटता है रिश्ता


स्मृतियों की हवा जब चलती,

राख आशाओं की ही मिलती।

अंतस अंगीठी सा सुलगता,

किसी से जब टूटता है रिश्ता।


अनवरत अश्रुधार है बहती,

किरचें आंखों में हैं चुभतीं।

मन आलय दर्पण चटकता,

किसी से जब टूटता है रिश्ता।


मावस होती रात पूनम की,

रूठती चांदनी जीवन की।

बुना हुआ हर स्वप्न उधड़ता,

जब किसी से टूटे है रिश्ता।


बदरिया दुख की पसर जाती,

बिजुरी बिरहा की तड़पाती।

नैनों  से  तब  मेह  बरसता ,

जब किसी से टूटता है रिश्ता।


स्नेह सुमन तमाम झर जाते,

प्रीत पत्र पीतवर्ण हो जाते।

नेह तरुवर समूल उखड़ता,

किसी से जब टूटता है रिश्ता।

No comments

Powered by Blogger.