ऐसी होती है माँ - by Pandit Ramesh Kumar Mishra
ऐसी होती है माँ
संसार में हमें लाने के लिए खुद कितने दर्द सहती है,
सिसकती है सुबकती है पर कुछ नहीं कहती है।
जिसकी आँचल में समा जाये सारा जहाँ,
ऐसी होती है माँ,
ऐसी होती है माँ।
बिन बोले उसे पता होता है की हमें क्या चाहिए,
कब भूख लगती है, कब दवा चाहिये।
बच्चों पे सदा नयोछावर होती है जिसकी जाँ,
ऐसी होती है माँ,
ऐसी होती है माँ।
स्वयं धुप में चलती पर हमारे ऊपर आँचल की छाँव रखती है,
खुद ठंड में ठिठुरती है पर हमें सीने से लगा के रखती है।
हमारे लिए कर देती अपने सारे सुखों का बलिदान,
ऐसी होती है माँ,
ऐसी होती है माँ।
हमारी एक आवाज़ पर दौड़ी चली आती हैं,
माँ आपकी याद मुझे बहुत सताती है।
इतना दूर हूँ फिरभी मेरे में ही बसती है तेरी जान,
ऐसी होती है माँ,
ऐसी होती है माँ।


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