आँख पत्थर बनी है नम कर दे - by Babita Agarwal Kanwal
आँख पत्थर बनी है नम कर दे
आँख पत्थर बनी है नम कर दे।
मेरे जीवन से कम ये ग़म कर दे।
है उजालों से दूरियाँ मेरी,
दिल के ज़ज्बात भी खतम कर दे।
इन हवाओं में गूंजती पायल,
दिल तड़पता है शोर कम कर दे।
हिज्र का ग़म सहा नहीं जाएं,
फासले मौत के ही कम कर दे।
बिन तेरे ज़िन्दगी नहीं जँचती,
जान ले ले मेरी करम कर दे।
डोर साँसों की टूटती लगती,
प्रीत की डोर का भरम कर दे।
कब कँवल को मिला सहारा था,
ये सहारा भी छिन रहम कर दे।


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