दूरियाँ - by Dolly Sharma 'Brajbala'


दूरियाँ

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कौन कहता है दूरियाँ, दूरी बढ़ाती है,

हमसे पूछे जनाब ये हमें और करीब लाती है।


मीलों दूर होकर पास होने का एहसास,

अलग-अलग रह कर भी रहना एक साथ।


मेरी एक आह पर उसका सिहर जाना,

मेरे ठहरे वक्त में उसका ठहर जाना। 


पास ना रहकर भी सब फर्ज निभाना,

सात फेरों का अपना हर धर्म निभाना।


तीज त्योहारों में एक दूसरे की राह तकना,

हमसफर के इंतजार में कभी न थकना।


एक अनूठा रिश्ता बस मन में संजोना

अलग मोतियों को एक धागे में पिरोना।


याद अक्सर आते हैं साथ गुजारे पल,

आस में हमेशा रहते हैं जरूर मिलेंगे कल।


कभी नहीं खत्म होती वो साथ रहने की आस,

बनाए रखते हैं एक दूसरे पर पूर्ण विश्वास।


कौन कहता इंतजार दूरी बढ़ाता है,

हमसे पूछे जनाब ये हमें और प्यार सिखाता है।


- डॉली शर्मा 'ब्रजबाला'

गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश

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