तमन्नाओं की तकदीर - by Punam Singh


तमन्नाओं की तकदीर

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मेरी तमन्नाओं की तकदीर हो तुम,

मेरी आशाओं के दीप हो तुम,

शबनमी शाम की रंगीनियाँ ही नहीं,

उगता आसमान का आफताब हो तुम ।।


उड़ते परिंदे से मन्दोन्मत्त हो तुम,

मेरी वफाओं ने तुझे इस कदर घेरा है,

जाओगे कहाँ तुम दूर मुझसे,

मैं शम्मा और परवाना हो तुम ।।


करेगी याद दुनिया हमारे अफसाने की,

महकता बसंत की पहचान हो तुम,

तेरी याद है जरिया मुझे तुझे पाने की,

मैं दरिया और साहिल हो तुम।।


 यह दुनिया वीरान है तुझ बिन, 

है गुलशन बेजान-सा तुझ बिन, 

है फिक्र मुझे तेरी बहुत, 

मेरी महफिल की जान हो तुम।। 


भूल न पाएँगे अफसाना तेरे प्यार का कभी, 

मैं नदिया की धारा हूँ और हो पतवार तुम, 

जीना मेरा गँवारा नहीं तुझ बिन, 

मैं राही और मंजिल हो तुम ।। 


- पूनम सिंह

नोएडा, उत्तर प्रदेश

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