भद्दा भालू (बाल कविता) - by Prem Kumar Tripathi 'Prem'
भद्दा भालू भद्दा भालू देख लोमड़ी, उस पर मुँह बिचकायी । लाल हुआ गुस्से से भालू, शामत दौड़ी आयी ।। भगी लोमड़ी जोर लगाकर, पीछे खेदा भालू । डरकर...
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भद्दा भालू भद्दा भालू देख लोमड़ी, उस पर मुँह बिचकायी । लाल हुआ गुस्से से भालू, शामत दौड़ी आयी ।। भगी लोमड़ी जोर लगाकर, पीछे खेदा भालू । डरकर...
हम तुम और वो मोहल्ले में नई पड़ोसन आई, पतिदेव की बाछैं खिल आई।। अब तो अलमारी से नए पेंट शर्ट निकल आए , पुराने सारे कपड़े रिजेक्ट करने के ऑर्ड...
मच्छर का आतंक छाया है, इसने मुझे बड़ा रुलाया है, पी पी कर खून मेरा, शरीर पर मेरे घाव बनाया है। ना कोई आल आउट काम करें, ना किसी अगरबत्ती से य...
पांच साल बितने के बाद, आ रही जनता की याद। नेता जी घर- घर घूम रहे हैं, चुनावी मुद्दा ढूंढ़ रहे हैं।। सज गई वादों की दुकान, सब बता रहे खुद को ...
गुरु को ऐसा होना चाहिए, जो ना रखे पढ़ाने की आस, विद्यार्थी रहें घर पर ही, हाजिरी बना कर परीक्षा में कर दे पास। पानी जो बरसा झमाझम, ...