मेरी प्यारी हिंदी - by Anu Pal


हिंदी से जुड़ाव मुझे बचपन से ही रहा है। ठीक-ठीक तो याद नही पर हाँ जब मैं थोड़ी बोलने लायक हुई थी तब पापा मेरे लिए एक किताब लाये थे बालभारती। और उन्होंने मुझे मेरी ज़िंदगी की पहली कविता पढ़ कर सुनाई थी जो मुझे आज भी अक्षरसः याद है। ये मेरा हिंदी से जुड़ाव की ओर पहला कदम था। जब पाठशाला के नई सत्र की शुरुआत होती थी तो मुझे पाठ्यक्रम की किताबों का बहुत इंतज़ार रहता था। जब पापा मुझें किताबें ला कर देते तो मैं दूसरे विषय की किताबें एक तरफ रखकर हिंदी की किताब उठा लेती और एक ही दिन में उसकी सारी कविताएं और कहानियां पढ़ डालती। हिंदी किसी जुनून की तरह मुझमें उतरती रही है। मुझे इस बात की बेहद खुशी है मेरी ज़िंदगी की पहली कविता "ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार" नही है। 


Click here for full details of Ayodhya Ram Mandir


       हिंदी हम जैसे भावनात्मक लोगों की भाषा है। अगर विचार एक मोती है तो हिंदी वो सीपी है जिसके भीतर ये मोती परिष्कृत होता है। मैं ये तो नही कहती कि मैं कभी किसी और भाषा में बेहतर नही लिख सकती या अपने भावों को हूबहू नही उकेर सकती। लेकिन हिंदी के अंदर जो अपनापन है वो मुझे इससे जोड़ता है। हिंदी ही वो जमीं है जिसपर भावनाओं का वृक्ष पनपता है। सारी दुनिया के चक्कर लगाने के बाद अपने घर लौटने पर जो असीम शांति मिलती हैं न बस वही एहसास मुझे हिंदी में लिखने में प्राप्त होती है। 


               हिंदी लेखन और पठन मेरे लिए आध्यात्म है। हिंदी पढ़ते वक्त किसी मंदिर में ईश्वर के सामने ध्यान लगाने जैसी अनुभूति होती है। हिंदी भी आध्यात्म की तरह बहुत गहन और विस्तृत है, जिसे पूरी तरह आत्मसात कर पाना संभव नही। हिंदी मेरे लिए बचपन की सहेली सी है जिससे मैं अपने सुख दुख बांटती हूँ। 


Click here for Lockdown essay 2020 in Hindi


        आज हिंदी देश विदेशों में सम्मानित है औऱ युवाओं में इतनी लोकप्रियता देखकर बहुत खुशी होती हैं कि अंग्रेजी की चकाचौंध से परे आजकल के युवा हिंदी साहित्य को पढ़ने व गढ़ने में रुचि ले रहे हैं।  मगर अपने देश में जब इसे राष्ट्र भाषा का दर्जा देने को लेकर बहस बाजी, क्षेत्रीय भाषाओं पर जबरदस्ती थोपे जाने के आरोप के मामले देखकर बहुत दुख भी होता है। हिंदी जुड़ाव की भाषा है, भारत को एकसूत्र में पिरोती है। इसका सम्मान हर भारतीय को करना चाहिए।




No comments

Powered by Blogger.