आज की जरूरत - by Gunjan Jadon


आज की जरूरत


सभलकर चलना दोस्तो सडकों पर संकट है भारी,

अभी-अभी जिन्दगी अनलॉक हुई है हमारी।


घर से निकलने से पहले सौ बार सोचना तुम,

अगर जरूरी हो तभी घर की सीमा को तोड़ना तुम

सीमा रेखा को तोड़ना न पड़ जाए, कहीं तुम पर ही भारी 

अभी-अभी जिन्दगी अनलॉक हुई है हमारी ।


बेडई, जलेबी, गोलगप्पे देख अपनी जिह्वा को बचाना,

हो सके तो ये पकवान अपने घर मे ही बनवाना। 

जिह्वा के साथ न आ जाए घर ही ये महामारी, 

अभी-अभी जिन्दगी अनलॉक हुई है हमारी।


इस अनलॉक जिन्दगी को फिर से न लॉक होने देना, 

हो सके तो कोरोना की लडाई मे अपना थोड़ा सा सहयोग देना 

हमारी  होशियारी ही कोरोना पर पडेगी भारी, 

दोस्तो इतनी सी गुजारिश है हमारी।


सभलकर चलना दोस्तो सडकों पर संकट है भारी,

अभी-अभी जिन्दगी अनलॉक हुई है हमारी।

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