जिन्दगी जंग है - by Suresh Sachan Patel
जिन्दगी जंग है
ज़िंदगी एक जंग है लड़े जा रहे हैं।
किसी तरह आगे हम बढ़े जा रहे हैं।
रास्ते कठिन हैं सभी की ज़िंदगी के,
कभी अपने कभी परायों से लड़े जा रहे हैं।
मार मंहगाई की भी हम सह रहे हैं।
पेट आधा ही भर कर बसर कर रहे हैं।
फटे वस्त्रों को तन में धारण किए,
गुजारा एक छप्पर में किए जा रहे हैं।
ग़रीबी की मार से तंग हो गए हैं।
दुःख मेरे अब सारे संग हो गए हैं।
मुसीबत नहीं छोड़ती संग मेरा,
दर्द दिल में लिए हम चले जा रहे हैं।
धूप में तन को झुलसाता हूॅ॑।
चाॅ॑द से मैं शीतलता पाता हूॅ॑।
दिन भर हाड़तोड़ मेहनत से,
खुशियाॅ॑ घर में लिए जा रहा हूॅ॑।
सपने सुहाने हमें भी आते हैं।
गीत खुशियों के हम भी गाते हैं।
लिए गरीबी का कलंक ज़िन्दगी में,
जीवन अपना जिए जा रहे है।


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