प्रेम करे माँ ऐसा - by Bhawna Sharma
प्रेम करे माँ ऐसा
भोली भाली सीधी- सादी ,
सारे जहाँ में न्यारी।
वारी जाऊं मैं जिस पर,
वह है मेरी महतारी।।
प्यार जताया कभी ना मुझ पर,
हरदम डांटा मुझको।
गुस्सा करती तुझ पे सदा मैं,
समझ ना पाई तुझको।।
विदा हुई जब घर से मैं,
तो फूट -फूट तू रोई।
हाल पूछती हर पल मेरा,
कई रात ना सोई।।
अब जाकर यह जाना मैंने,
प्रेम तेरा है कैसा।
कोई ना कर पाए जहाँ में,
प्रेम करे माँ ऐसा।।
मेरी माँ के चरणों में,
मैं नित-नित शीश नवाऊं।
रूठे अगर मेरी माँ मुझसे,
पल-पल उसे मनाऊं।।

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