मनमीत - Shalini Sharma "Swarnim"


मनमीत


तुम ही मेरे जीवनसाथी,

तुम मेरे मनमीत हो ।

तुम हो दीपक मैं हूं बाती, 

तुम जीवन संगीत हो ।


ठंडी ठंडी छांव हो तुम,

संघर्षों की धूप में।

तपती धरा को मिलती राहत, 

जैसे वर्षा बूंद में ।

तुम से ही हारी हूं मैं,

तुम ही मेरी जीत हो ।


तुम ही मेरे जीवन साथी,

तुम मेरे मनमीत हो।


हाथ थामे मैं चलूंगी, 

दुर्गम कंटक राहों में।

ढूंढना ना कोई पीड़ा 

अब मेरी आहों में।

तुम ही मेरा धर्म हो, 

तुम ही मेरी रीत हो।


तुम ही मेरे जीवन साथी,

तुम मेरे मनमीत हो। 

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