क्षणिक मिलन - by Anju Saxena


क्षणिक मिलन


क्षणिक मिलन की उस घटना को

नाम न देना प्रीत -प्रेम का

है अनुरोध यह मेरा तुमसे

नाम न देना उसे जीत का


मन की चंचल उस मैना को

न देना पिंजरा वो हृदय का

मोल न जाने वो तो पगली

चंचल है चपला है आख़िर

पंछी है वो खुले गगन की

नाम न देना उसे स्वार्थ का


मैना के उन मधुर स्वरों पर

जिसपर मोहित हुआ तुम्हारा

प्रेम भरा दिल दिया जो तुमने

है अनुरोध यह मेरा तुमसे

नाम न देना उसे गीत का


उड़ जाएगी वो गगन से इक दिन

जिसको चाहा बाँधना तुमने

अपनी तपती बलिष्ठ भुजा मे

है वो साथी अपने मन की

लेकिन है अनुरोध यह तुमसे

नाम न देना उसे मीत का


पल -छिन मीठी प्रेम दृष्टि सी

जो पड़ गई बोछार सी तुम पर

सावन की उन चंद बूँदों से

होता न प्रभाव मानस पर

है अनुरोध यह मेरा तुमसे

नाम न देना उसे रीत का

नाम न देना प्रेम -प्रीत का 

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