शब्द - by Rajesh Shrivastava
शब्द
इसके न हाथ न ही पाँव हैं
पर घूमती शहर व गाँव हैं
कभी कोई दुःख की मरहम
कभी हृदय चीरती घाव हैं
शब्द रोज के चलन
शब्द बन जाती जलन
शब्द की यात्रा गहन
शब्द ही ठहराव है
इसके न हाथ न ही पाँव है
संस्कृति का आधार है
विकृति की भरमार है
मनःस्थिति का उपचार है
सम्वेदना के भाव है
इसके न हाथ न ही पाँव है
देखे व्यवसाय शब्द के
पढ़े अध्याय शव्द के
नहीं पर्याय शब्द के
अभिव्यक्ति की बहाव है
इसके न हाथ न ही पाँव है
शब्द बाण भी है फूल भी
शब्द शिखर भी है धूल भी
शब्द मूल भी है निर्मूल भी
शब्द ही भव्य है आभाव है
इसके न हाथ न ही पाँव हैं


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