नारी नहीं बेचारी - by Chanrej Ram Ambuj


नारी नहीं बेचारी


पहले   कभी   रही   होगीं,

अब  नारी  नहीं  बेचारी हैं।

केवल  कोमल  हृदय नहीं,

अब जलती हुई चिंगारी है।।

पहले कभी-------------------


 नारी  नर   के  आगे   चलती,

 पथ    प्रदर्शक    न्यारी    हैं।

कर्म कुसुम से चमन सुगंधित,

कुसुमित  कुल  की क्यारी हैं।।

पहले कभी------------------


 युद्ध भूमि मे सैन्य सँवारे,

तलवार  बनी  दुधारी   हैं।

केवल कोमल  कली नहीं,

वे   दुर्गा  शेर   सवारी  है।।

 पहले कभी -----------------


मानवता की रक्षा  को वह,

काली   खप्पर   वाली  हैं।

असुरों को दंडित करने को,

 बन जाती  बीहड़ वाली हैं।।

पहले कभी------------------


 इनकी  अमर  कहानी  को,

 गाती   दुनिया   सारी    है।

 करुणा हृदय भरा है इनके,

 ममतामयि    महतारी    हैं।।

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