मेरी दुनिया, मेरी माँ - by Bhim Kumar


मेरी दुनिया, मेरी माँ


मेरी दुनिया, मेरी माँ है।

इनके कदमों में ही सारा जहाँ है।

इन्हीं के बदौलत आज यहाँ मैं  खड़ा हूँ,

नादान हूँ पर मैं आज धरा पर पड़ा हाँ।

माँ की नजरों में छोटा हूँ ,बड़ा हूँ ,प्यारा हूँ,

जैसा भी हूँ पर आँखों का तारा हूँ।

अंगुली पकड़ कर चलना सिखाया,

भूख न हो फिर भी भरपेट खाना खिलाया।

सारे सुख- सपने हैं माँ है तो हसीन जिंदगी है,

पर पूछो उनसे जिनकी माँ न हो, वो कैसी जिंदगी है।

हर दुख- दर्द को सह कर हँसना सिखाया,

मुश्किलों से डट कर आगे बढ़ना सिखाया।

माँ की धड़कन हूँ मैं, मैं हूँ तो साँसे हैं मेरी माँ की,

धन - दौलत सब फीका है भीम, माँ ही जन्नत है जहाँ की।

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