सखी री - Sneha Chouhan
सखी री
सखी री,
कमाल की बात हो गई।
बरसों के बाद मुलाकात हो गई,
जुगनू की तरह पहचान हो गई।
कुछ पल में मेरी जान हो गई,
हंसी की एक अदा से नई बात हो गई।
सखी री,
कमाल की बात हो गई।
सपनो के सफर में हकीकत दिखा गई,
जिंदगी में रोते हुए को हंसना सीखा गई।
पल भर में नजरो से ओझल हो गई,
आंखो में आंसू बनकर सैलाब हो गई।
सखी री,
कमाल की बात हो गई।
बिताए हर लम्हे सौगात हो गए,
कुछ पल की मुलाकात जान हो गई।
चांद से कब पूनम का चांद हो गई,
पलकों की छाव बनकर कब ईद का चांद हो गई।
सखी री,
कमाल की बात हो गई।


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