स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें देशभक्ति रचनाएँ
स्वतंत्रता दिवस पर पढ़ें देशभक्ति रचनाएँ
ये आजादी
आजादी पाने की खातिर प्राणों की कुर्बानी दी है
भारत माँ के वीर सपूतों ने अपनी बलिदानी दी है
केसर तिलक लगा भाल पर मशाल जलाई क्रांति की,
अपने तन का रक्त बहाकर तिरंगे को सलामी दी है।
झांसी की लक्ष्मीबाई ने जब भारी हाहाकार मचाई थी
अंग्रेजी हुकूमत से लड़कर आजादी की राह सजाई थी
याद आ रही है सन् सत्तावन की क्रांति आज मुझे
गोरे फिरंगियों को जिसने कई बार धूल चटाई थी।
भगतसिंह,सुखदेव,राजगुरु ने अंग्रेजों से लड़ी लड़ाई थी
मातृभूमि की आन की खातिर हंसकर जा़न लुटाई थी
चंद्रशेखर आजाद ने भी अंग्रेजों को खूब छकाया था,
अपना स्वाभिमान बचाने को खुद पर ही गोली चलाई थी।
वीर क्रांतिकारियों के बल पर ही हमने ये नेमत पाई थी
अनगिन कुर्बानी देकर ही आजादी की बिगुल बजाई थी
अपनी प्यारी स्वतंत्रता को रखो बचाकर तुम यारों,
जिसने हमारे पूर्वजों से बहुत गुलामी कराई थी।
✍🏻 ममता रिछारिया
टिमरनी-हरदा म.प्र.
देशभक्त परिंदे
✍🏻प्रियंका पांडेय त्रिपाठी
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
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आत्मनिर्भर भारत
हे शीर्ष पर बैठे नेता महान
सुनें देश का आह्वान
क्या देश की है आवाज
क्या जनमानस कह रहा है आज
चीन का कुटिल प्रपंच
भूमि चुराना अंश अंश
अब समय है प्रहार का
प्रतिउत्तर का, हुंकार का
समझौते की अब बात नहीं
ये भारत है सौगात नहीं
हर क्षेत्र में हम वार करें
चीनी उत्पादों का प्रतिकार करें
सब चीनी ठेके रद्द करें
परोक्ष निवेश भी प्रतिबंध करें
उद्यमियों का आह्वान हो
अब देशी हर सामान हो
देशी उत्पादों की तैयारी हो
सुविधा मिले जो सरकारी हो
बिजली, पानी, भूमि, निवेश
कर में छूट, प्रोत्साहन विशेष
देशी ही प्रतियोगी हों
और देशी ही उपभोगी हों
अब देशी समान हो घर घर
और भारत बनें आत्मनिर्भर
✍🏻राजेश श्रीवास्तव
बंगलुर, कर्नाटक
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स्वाधीनता
खुद में एक तिरंगा हर योद्धा,
देशभक्ति का जज्बा योद्धा,
मर मिटेगा वतन पे हर तन,
लहराके चमन में अपना तिरंगा।
आंच कभी न आने देंगे,
मर कर वतन की रक्षा करेंगे,
षड्यंत्र कैसा भी कोई रच ले,
सफल उसे न होने देंगे।
हमारी आन बान शान तिरंगा,
विश्व पहचान हमारी तिरंगा,
कफ़न बांधे चलते हैं हम तो ,
बेटे बेटियां हम भारत मां के।
सभ्यता संस्कृति का गौरव है,
सुख समृद्धि का पूरक है,
युद्ध कारगिल में दिखा दिया,
वतन का अभिमान तिरंगा।
दिया मात दुश्मनों को युद्ध में,
फतेह किया कारगिल को सेना ने,
शहादत दी जाने कितनो ने,
बढ़ ना पाए दुश्मन वतन में।
नमन हमेशा उस समय और पल को,
खेल गए योद्धा अपनी जान को,
भारत मां के वीर सपूतों,
प्रणाम हमारा बारंबार अर्पित हो।
भारत मां पर सब कुर्बान,
कारगिल में गूंजा यही गान,
वीर सैनिकों को दिल से सलाम,
वतन भारत उनकी पहचान।
स्वाधीनता दिवस हमारा त्योहार ,
मिलकर मनाएंगे हम हर सांस,
भूले न अपने वीरों को,
फूल समझा जिन्होंने गोली को।
अपने को हम भी तैयार रखे,
वतन की हिफाज़त का प्रण सब करे,
स्वाधीनता दिवस का हमारा पैगाम,
भारत देश सबसे महान।
✍🏻संध्या तिवारी
फरीदाबाद
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भारत एक फुलवारी
संकटों के काँटों में भी सदा मुसकाता,
अपना भारत भी हरी-भरी फुलवारी है ।
संतों-विद्वानों-देशभक्तों द्वारा गए सींचे
इसके फल-फूल-पत्ते,प्रत्येक क्यारी है ।।
संकटों के काँटों में भी सदा मुस्काता,
अपना भारत भी हरी-भरी फुलवारी है ।।
यहाँ प्रेम-ज्ञान की अजब बोली है,
ये विविध-विचारों से सजी रंगोली है,
यहाँ हर रात दीवाली, हर दिन होली है,
यहाँ प्रकृति ने अपनी तिजोरी खोली है
जिसपे कइयों की नीयत डोली है,
बेशक़,हाथ में बंब,बन्दूक ना गोली है,
हमारे श्रम-संघर्षों को देखकर...
कई शैतानी ताक़तें भी ,यहाँ हारी है ।
संकटों के काँटों में भी सदा मुस्काता,
अपना भारत भी हरी-भरी फुलवारी है ।।
✍🏻संदीप कटारिया
करनाल, हरियाणा
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मेरा भारत देश गज़ब है
मेरा भारत देश गज़ब है
तरह-2 के यहाँ मज़हब है
सभी लोग मिलजुल कर रहते
अलग-2 सबके करतब है ।।
मेरा.भारत देश......
भारतीय संस्कृति के रखवारे
बड़ो का नाम न कोई पुकारे
सभी को इज्ज़त मिले यहाँ पर
जाति-पाँति से क्या मतलब है ।।
मेरा भारत देश.........
बददिमाग कुछ आते हरदम
आतंकी का देखा है दम
भारत में कुछ शोर मचाते
देश हमारा इक मकतब है ।।
मेरा भारत देश.............
रहे तिरंगा मेरा ऊँचा
तीन रंगों से बना समूचा
फ़क्र करो स्वतंत्रता दिवस पर
जग माने इसका अरदब है ।।
मेरा भारत देश गज़ब है...
✍🏻भारत गौरव डॉ. संगमलाल त्रिपाठी "भँवर"
प्रतापगढ़, उ.प्र.
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देश महान है
राम, नानक, महावीर के अवतारों से
लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा की तलवारों से ।
भीष्म,कृष्ण और हनुमान की शक्ति से
सति सावित्री और शबरी की भक्ति से ।
वेद,पुराण,रामायण और गीता के ज्ञान से
ऋषि मुनियों के जपतप और ध्याान से ।
योग, प्राणायाम और आयुर्वेद विज्ञान से
राजा हरिशचंद,और विक्रमादित्य महान से ।
पृथ्वीरराज, महाराणाप्रताप के स्वाभिमान से
रानी पदमनी और लक्ष्मी बाई के बलिदान से ।
बोस, चन्द्रशेखर, भगतसिंह की कुर्बानी से
वतन पर मर मीटे शहीदो की जवानी से ।
आर्यभट्ट, रामानुजन, वारहमिहिर की खोजो से
चन्द्रगुप्त मौर्य और वीर शिवाजी की फौजों से ।
सूरदास,रविदास और तुलसीदास की चौपाईयों से
पंत,प्रसाद, टेगौर और प्रेमचन्द्र की कहानियों से ।
हरिदास,तानसेन, जसराज, भीमसेन, के गायन से
बिस्मिल्लापखां, रविशंकर, और जाकिर के वादन से ।
रमन, भाभा ,कलाम के अनुसंधानो से
टाटा, विडला, अंबानी के कारखानों से ।
भरतनाट्यम,कत्थक,भांगडा गरबा आदि नृत्यों से
कश्मीर, उत्तरांचल, पूर्वांचल के मनोरम दृश्यों से ।
ताजमहल, अक्षरधाम और राजस्थान के किलों से
स्वर्णमंदिर, अजंता गुफा और सांची के स्तूपों से ।
रफी मुकेश, किशोर, आशा लता के तरानो से
प्रदीप, नीरज,मजरूह और गुलजार के गानों से ।
दारासिंह, ध्यारनचंद, सचिन, नीरज,मीरा के खेलों से
नासिक,प्रयागराज,उज्जैन,हरिद्वार के कुंभ मैलो से ।
बद्रीनाथ, रामेश्वमर द्वारका, जगन्नांथ धामों से
गांधीजी, नानाजी, फूले विवेकानंद, के कामो से ।
गंगा, यमुना, नर्मदा कावेरी के किनारों से
होली दीपावली, ईद, वैशाखी के त्योोहारें से ।
हमारी सभ्यता संस्कृति और संस्कारो से
लोगों के आचार,विचार और व्यवहारों से
✍🏻दीपक शर्मा
टिमरनी, जिला-हरदा, म.प्र.

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