बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ - by Saroj Shukla
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
-
गर्भ में नष्ट ना करने दिया
दुआओं में माँगी थी बेटी ,
बेटी बचाई और बेटी पढ़ाई
पंख दिया परवाज़ भी ,
और दिया था खुला आसमां
अवसर स्व के विकास की
पर यहाँ विचरते असुरों ने
उसे निर्भया बना दिया ।
कन्या पूजन की गर्वित परंपरा
भारत की पहचान रही ,
मातृ प्रधान समाज-संस्कृति
वैज्ञानिक और महान रही ।
क्षीर सागर में आके जैसे
मिल गन्दे नाले का घुलना
बीच समाज में छुप कर रहना
आतातायि पिशाच विधार्मियों का,
किया मुश्किल बेटी का जन्मना
दूभर उसका हुआ फलना फूलना,
कन्याभ्रूण के नष्ट को मजबूर,
माँ-बाप को इल्जाम ना देना।
पहले असुरों का नाश करो
फिर कन्या जन्म की बात करो,
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का
अपना नारा ये तभी सार्थक हो ।
- सरोज शुक्ल
पटना, बिहार
No comments