बेटियाँ - by Om Prakash Aash
बेटियाँ
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बेटियों से आस भरा हर पल है,
बेटी हो तो जीवन का कल है।
घर आँगन को करती है रोशन,
माँ बाप को लोटा भर जल है।
बेटियाँ परिवार की पहचान दे,
भारतीयता की अद्भुत शान है।
चोटियों पर चढ रही ये बेटियाँ,
सृष्टि गौरव युग का गुणगान है।
आँगन के तुलसी-सी सुगंधित,
माँ बाबुल की हर मुस्कान हैं।
स्नेह प्रेम आदर भाव समेट,
बेटियाँ कल के कुल सम्मान है।
ध्यान रखती सेवार्थी पूर्ण भाव,
आने वाले कल के दिप्तिमान है।
अबला नहीं सबला बनी बेटियाँ,
छूती रही चढ़ के आसमान है।
बेटियाँ सृजनात्मक सम्मान,
खो मत वजूद तो पहचान है।
घर रोशनी दे करती प्रकाशमय,
बेटी से घर का बढता स्वाभिमान है।
बाबुल के दिल की अरमान बेटी,
शिर के पगड़ी का है मान बेटी।
बेटी बचाओ लेकर संकल्प तुम,
सभ्यता संस्कृति की खान बेटी।
- ओम प्रकाश आस
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
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