ॐ सूर्याय नम: - by Madhuri Verma


ॐ सूर्याय नम:

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सूर्य ही एकमात्र देव हैं, जिनका दर्शन हम नित पाते ।

ऋषि मुनि और देवगण, सभी इनका ध्यान लगाते ।

ऋग्वेद काल से ही, चली आ रही सूर्य की उपासना ।

ब्रह्मा विष्णु के संवाद में भी, है सूर्य की आराधना ।

सूर्य हैं जगत् गति नियन्ता, सभी ग्रहों के हैं सम्राट ।

नमन है तुमको हे तिमिर नाशक, हे प्रकाश पुंज विराट ।

शापित हो दुर्वासा से जब, कृष्ण पुत्र हुए कुष्ठ से ग्रसित ।

सूर्य आराधना से ही, हुए रोगमुक्त पुराण में है वर्णित ।

सूर्योदय की पूजा ही, रोग मुक्ति का सशक्त साधन है

सूर्य से ही अन्न जल, खिलते पुष्प हरित धरती जनजीवन है ।

दिवा-रात्रि ऋतु परिवर्तन, होता है जग में सब तेरे कारण 

तन्द्रा हरते हो पशु पक्षी, और मानव को देकर जागरण ।

रवि दिवाकर भानु भास्कर अर्क आदित्य तेरे हैं सब नाम ।

प्रति प्रदेश में हैं तेरे मंदिर, कोणार्क में दिखते अद्भुत ललाम ।

महर्षियों ने पूजन हेतु, सूर्य नमस्कार का दिया है योगज्ञान ।

सकारात्मक ऊर्जा मिलती, अरुणोदय पर करने से अर्घ्य दान।

डाला छठ का व्रत तो महापर्व है,तीन दिनों का है अनुष्ठान ।

निराहार लिये सूप में सभी, मौसमी फल और विविध पकवान ।

सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों की, करते उपासना दे अर्घ्य दान ।

मेरा भी वंदन स्वीकार करो, अज्ञान हरो हे सूर्य भगवान ।

    

- माधुरी वर्मा

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

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