माँ तुम ममतामयी - by Supriya Sinha
माँ तुम ममतामयी
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माँ तुम ममतामयी
फ़रिश्ता हो ....
जिनकी झोली से टपकता
हर वक़्त स्नेह की मोती ,
जिनकी दुआ में छलकता
हमेशा बच्चों की सलामती
के लिए ममत्व की ज्योति।
माँ मैं खुशनसीब हूँ
जो तेरे आँचल में
पली - बढ़ी ,
तेरा हाथ पकड़ मैं
नन्हें - नन्हें पग से
जीवन-पथ पर आगे बढ़ी।
माँ मैं तुमसे दूर हूँ
पर तेरी दुआ हमेशा
मेरे साथ है ,
जब-जब होती हूँ तन्हा
तेरे मधु - स्पर्श का
मीठा - सा एहसास
थाम लेती मेरा हाथ है ।
माँ जब मैं कर्तव्य-पथ से
हो जाती हूँ विमुख
मेरे सपने में आती है
हौले-हौले , कहती है...
निराश मत हो ,
आशा की लौ बुझने
मत दो ।
डर मत, हौसला मत हार
अपने लक्ष्य की ओर
निरंतर आगे बढ़ते रहो ।
माँ तू दुनिया की
सबसे अच्छी माँ है ,
कदम बहक जाए तो
तू सँभाल लेती है ।
कुछ गलती करूँ तो
डाँटती भी है ।
और फिर खुद मुझे
अपने सीने से लगा लेती है ।
माँ, सचमुच तू देवी है
खुदा की मूरत है ,
स्नेहाशीष बरसाने वाली
माँ, तू ममतामयी
अमृतरस है ।
- सुप्रिया सिन्हा
मुंगेर, बिहार
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