सुनो सनातनी - by Akshai Kumar Saxena
सुनो सनातनी
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सुनो सनातनी, गुनो सनातनी !
ऐसा शासक कभी न चुनना जो छोड़े मझधार में,
न मानी , कर ली ; जो मनमानी
समझो आ पहुँचे आतंकिस्तान में ,
धर्म बचे, संस्कृति बचे और बची रहे ध्वजा
स्वतंत्र स्वदेश में श्वास लेने का अलग है मजा
समस्याओं में तपना, कुन्दन-सा बनना,
प्रक्रिया कुछ जटिल जरूर है ।
परन्तु हमारे पूर्वजों ने थी अपनाई ।
वीरों का विराट स्वरूप देख,
दुश्मन ने मुँह की खाई ।
जो विषम समय हो और संकट निकट हो तो
मौन की भाषा अपनाओ
सबकुछ दे कर सर्वप्रथम स्वदेश बचाओ !
सुनो सनातनी, गुनो सनातनी !
समझो और समझाओ
नेतृत्व और शासक तक सरल संदेश पहुँचाओ ।
"देश बचेगा तब शासक बन पाओगे"
वरना "कहाँ जाकर अपना मुँह छुपाओगे" ।
- अक्षय कुमार सक्सेना
शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश
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