कविता - by Mithilesh Tiwari "Maithili"


कविता

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कविता सर्व सत्य का दर्पण है,

चरणों में जिसके सब अर्पण है।

शब्द अर्थ का तोल-मोल है,

भाव सुधा पूरित घट अनमोल है।।


कविता शीतल चंदन है,

ये अंतर्मन का चिरवंदन है।

नित उर्जित एक शक्तिपुंज है,

भाव विविधता का संयुक्त कुंज है।।


 कविता माधुर्य का मंजर है,

 अंर्तवेदना का निनाद निर्झर है।

 वात्सल्य भाव का झंकृत स्वर है,

 हर स्वरूप उर रुचिर प्रवर है।।

  

कविता  गागर में सागर  है,

मणि मुक्ता सज्जित रत्नाकर है।

गुलदस्ता भाषा  उपवन का है,

रंगरूप रसगंध जीवन का है।।


कविता एक अमृत मंथन है,

घर्षण में जिसके छिपा अमृत है।

यह एक ऐसा जीवन दर्शन है,

डूबकर जिसमें मिलता सुकृत है।।


कविता देखे नहीं गरीब-अमीर है,

बस भाव भरे भाषा  तुणीर है।

भक्ति के चरमोत्कर्ष मीरा सूर हैं,

बनते कालजयी तुलसी कबीर है।।


- मिथिलेश तिवारी "मैथिली"

प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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