हिंदी राष्ट्र की धरोहर है - by Dr. Akanksha


विभिन्नता में एकता लिए 

जाति धर्म भूल समरसता लिए 

वैश्वीकरण एवं निजीकरण के परिदृश्य में

 हिंदी राष्ट्रभाषा की परिचायक है

हिंदी धरोहर है हिंद देश की 

यह केवल भाषा नहीं पूंजी है स्वदेश की।

युगों युगों से इसने मिशाल अपनी पेश की 

वाणी सदैव ही रही यह धर्मोंपदेश की ।

कहीं संस्कृत संघ सहचरी बन चलती रही 

तो उर्दू अरबी संग भी साथ निभाती रही ।

प्राकृत अपभ्रंश खड़ी बोली संग

 निरन्तर हिंदी तक चलती रही

 लिपि सदैव इसकी देवनागरी ही रही 

सब मिले एक हो चले

 हिंदी की तो बस यही एक नीति रही

 हिंदी राष्ट्र की धरोहर है

 राजभाषा पद को सुशोभित करती

 राष्ट्रभाषा के रूप में पहचान बनाती

हिंदी अति सुंदर सहज मनोहर है।।




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