सच्ची कोशिश - by Deepa Gupta
विल्मा हमेशा अपनी मां से पैर में दर्द होने की शिकायत करती थी । डाॅक्टर को दिखाने पर पता चला कि उनको पोलियो हुआ है । लेकिन विल्मा की मां ने न अपनी हिम्मत को टूटने दिया और ना ही अपनी बेटी की । पांच साल के इलाज बाद अब वह धीरे-धीरे केलिपर्स के सहारे चलने तो लगी पर डाॅ. ने जवाब दे दिया, कि अब वह कभी बिना किसी सहारे के नही चल पाएगी । विल्मा इस बात से हताश न हो जाए इसलिए उनकी मां ने विल्मा का स्कूल में दाखिला करवा दिया ।स्कूल में दौड़ प्रतियोगिता को देख विल्मा ने पूछा-" मां क्या मैं भी कभी इस तरह दौड़ पाऊंगी?"
मां ने जवाब दिया- "अगर मन में सच्ची लगन हो, भावना हो ,विश्वास हो, कुछ पाने की चाहत हो तो हम कुछ भी कर सकते है।" मां की इस बात को मन में गांठ बांध कर रख लिया और उन्होंने चलने की कोशिश की लेकिन केलिपर्स के कारण वह सही ढंग से चल नही पाती थी । इसलिए मां से जिद कर केलिपर्स को उतार फेंका । उसके बिना वह एक कदम चलती और गिर पड़ती । फिर भी उन्होंने हार नही मानी, निरंतर कोशिश करती रही । कुछ ही साल में उनकी लगन रंग लाई और अब वो बिना किसी सहारे के चलने लगी । डाॅ.एम्वे को विल्मा को बिना किसी सहारे के चलता देख बहुत खुशी हुई और विल्मा के हौसले को बढ़ाने के लिए शाबाशी दी । उनकी शाबाशी ने मानो विल्मा में एक नयी उर्जा भर दी हो । उसी समय उन्होंने सोच लिया कि वह एक धावक बनेगी । डॉ. ने उन्हें बास्केट्बाल खेलने की सलाह दी ।
स्कूल मैनेजमेंट ने भी विल्मा के जज्बे को देख, उनके सपने को पूरा करने में उनका सहयोग किया और १९५६ में पहली बार उन्होंने अंतर्राविद्यालय दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया । इस प्रतियोगिता में उन्हें आखिरी स्थान मिला लेकिन इससे वह हताश नही हुई । उन्होंने अपनी कमी को तलाश उसे दूर करने की कोशिश करने लगी । वो लगातार ८ बार असफल भी हुई पर उन्होंने कोशिश नही छोड़ी । ९ वीं बार में अपनी लगन के जरिए उन्होंने पहली बार जीत का स्वाद चखा ।
फिर विल्मा की मुलाकात टेनिस राज्य विश्वविद्यालय में टेम्पल से हुई। विल्मा ने कोज से अपने मन की बात कही, कि सर मैं एक तेज दौड़ने वाली महिला बनना चाहती हूं। "तुम्हारी इसी इच्छाशक्ति के वजह कोई भी तुम्हें रोक नही सकता।और मैं तुम्हारी मदद करूंगा।"- कोज ने विल्मा से कहा। वह निरंतर कोशिश करती रही और आखिरकार उन्हें १९६० में पहली बार ओंलिपिक में दौड़ने का मौका मिला। उन्होंने उस वक़्त की सबसे तेज धाविका "जुत्ता हेन" को १०००मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में हराकर स्वर्ण पदक जीता। लगातार ३ बार जुत्ता हेन को हराकर विल्मा सबसे तेज धाविका बन गई।
जो कभी बिना किसी सहारे के चल भी नही सकती थी, लेकिन अपनी सच्ची कोशिश और दृढ़ निश्चय से "विल्मा रुडोल्फ"ने न केवल नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया बल्कि दौड़ प्रतियोगिता में ३ मैडल जीत इतिहास में अपना नाम भी दर्ज करा लिया।
Writer:- Deepa Gupta
From:- Kolkata, West Bengal (India)

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