बेटी बचाओ, बेटी पढाओ - by Mamta Richhariya
बेटी बचाओ, बेटी पढाओ
बेटी को बचाओ,बाबा!
बेटी को पढाओ।
नन्हीं सी किलकारी को
गूँज तुम बनाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा!
बेटी को पढा़ओ।
माँ के दिल के टुकडे़ को
भोले भाले मुखडे़ को
पिता के प्यारे सपने को
दुनिया में तो सब लाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा!
बेटी को पढा़ओ।
कोमल अहसासों को
आजन्मी सी आसों को
उखडी़-उखडी़ साँसों को
धीरज तो तुम बंधाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
नन्ही सी चिडिया को
जादू की पुडिया को
खुशियों की डिबिया को
पंख तुम लगाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
देवी के वरदान को
नारी के सम्मान को
नन्हे से भगवान को
तुम ऐसे न तड़पाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
अपने तन के हिस्से को
प्यार के इस किस्से को
आनंद के उस जलशे को
भाग्य रेखा तुम बनाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
वेदों की ऋचाओं को
भागवत की प्रथाओं को
कृष्णा की गोपिकाओं को
मन-मंदिर में तुम बसाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
आँगन की क्यारियों को
गुलाब की पंखुडियों को
तोरण के स्वस्तिकों को
बुरी नजरों से बचाओ।
बेटी को बचाओ बाबा
बेटी को पढा़ओ ।
नन्ही सी हथेलियों को
चंपा और चमेलियों को
रक्तिम सी धमनियों को
सुरक्षित तुम करवाओ।
बेटी को बचाओ ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
नन्हे कदमों की निशानी को
पापा की गुडिया रानी को
घर की नन्ही सयानी को
नित आगे तुम बढा़ओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
चंचल सी अँखियों को
मीठी-मीठी बतियों को
दिनकर की रश्मियों को
ज्वाला सी तुम बनाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
माँ की चूडियों की खनखन को
बाबा के हृदय की धड़कन को
सरिता की मंद कलकल को
सुरमयी नाद तुम बनाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।
जब पढेंगी बेटियाँ
आगे बढेंगी बेटियाँ
भविष्य बनेंगी बेटियाँ
देश की पहचान नव बनाओ।
बेटी को बचाओ,बाबा
बेटी को पढा़ओ।


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