क्या है नारी - by Rashmi Mukesh Vyas


क्या है नारी


नारी आँगन में पुष्प सी खिलती सुगंध है,

उसे स्वयं सजाए घोंसले में रहना पसंद है,

पंख फैलाकर उन्मुक्त गगन में उड़ती है,

अपने स्वाभिमान में खोकर नहीं किसी से डरती है,

अबला नहीं,सशक्त है,

सपनों का आकाश है,

अँधेरी गलियों में आशा का प्रकाश है,

जग जननी है नारी, 

कभी ना किसी से हारी,

ईश्वर की अद्भुत रचना,

करुणा का सागर गहरा,

संस्कारों की शाला जैसे लक्ष्मी, सावित्री सीता,

स्रष्टी सृजन करने को प्रसव वेदना सहती है,

इसीलिए तो वो सबके दिल में रहती है,

बीवी,बेटी,माँ,अर्धांगिनी और बहुरानी,

रमणीय घर सजाने को बनकर रह गई स्वयं कहानी,

नारी जीवन समझने का जरीया है,

स्नेह का सागर और ममता का लहराता दरिया है।

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