हैं गर्दिश में जीस्त - by Sanjay Srivastava
हैं गर्दिश में जीस्त
है गर्दिश में जीस्त मगर मैं
गीत खुशी का ही गाऊंगा,
आँखों में अश्कों का धार मगर
तेरी यादों से ही इठलाऊंगा।।
फिक्र करे वो जो गम से विचलित हो जाते हैं,
परछाई बन मैं संग चलूंगा
खुशियों का बस रंग भरुंगा
तेरी यादों का मैं गीत लिखूंगा।
तू दूर मगर ख्वाबों में छा जायेगी
बस तू ही तू रह जायेगी,
संग न कोई साथ चले फिर भी
मैं पग-पग पे तेरी यादों का दीप जलाऊंगा,
दिल को अपनी वादों का याद दिलाऊंगा
जग में कुछ कर जाऊंगा
तेरे नाम की जो कश्ती मेरे साथ चले,
मैं उसको भी पार लगाऊंगा।।


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