माँ ऐसी ही होती है - by Ranjana Joshi
माँ ऐसी ही होती है
सपने बुनने लगती है माँ
जब माँ कहता है लाल उसे
बाँध लेती है उम्मीदें इतनी
जितनी आशाएं है उसके पास
क्या बनेगा क्या करेगा
इससे भी है वो अनजान
बस यही एक लगा उम्मीद
रौशन करेगा वो उसका नाम
पल- पल बढ़ती उम्र देख
नज़र उतारा करती है
कब आयेगा कंधे तक
दीवारें नापा करती है
जब झुकता है माथा उसका
चुंबन बरबस ले लेती है
दुनिया की नजरों से बचा
अपने आँचल से ढ़क लेती है
छू जाए अगर तिल भर भी दुःख
आंखे समुंदर बन जाती है
हर पल हर क्षण हर घड़ी
चिंता उसी की रहती है
जब तक ना आ जाए लाल उसका
पूरे घर में वो टहला करती है


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