प्रकृति की सुन्दरता - by Dr. Manoj Kumar Joshi
प्रकृति की सुन्दरता
प्रकृति तेरी सुन्दरता का, क्या मैं गुणगान करूँ,
तेरा कण - कण इतना सुन्दर है ,क्या मैं बखान करूँ।
तेरा पावन निर्मल जल, अमृत सा सुन्दर
तेरी माटी की सुगंध मन का कोना-कोना पावन कर दे
प्रकृति तेरी सुन्दरता का................
कल -कल बहते झरने और नदियाँ
मंद -मन्द बहती पवन सुगन्धित
पक्षियों की चहचहाहट
सुन्दर ,मनभावन और पावन हिमालय
प्रकृति तेरी सुन्दरता का................।
तेरा हर इक पर्वत कहता एक नई कहानी।
अमर बलिदानी हो गए जो वह तुझसे थे मानी।
रक्त का कण-कण तुझ को समर्पित कर दिया ।
प्रकृति तेरी सुंदरता का.....।
शस्य श्यामला धरा निरंतर तेरा गुणगान करती है
नदियाँ तेरी नित हमको संगीत सुनाती है
कल कल बहती पावन पवन सुगंधित
मन को आनंदित करती हैं
प्रकृति तेरी सुंदरता का.........।


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