मन में जब तु ठानेगा - Nisha Choudhary


मन में जब तु ठानेगा

दूर अंधेरा होगा और 
प्रकाश वहाँ छा जायेगा।
मन में जब तु ठानेगा,
तो पर्वत भी समतल हो जायेगा।

ऊँची-ऊँची दीवारों को,
पार तु कर जायेगा।
मन में जब तु ठानेगा,
तो हर मुसीबत से लड़ जायेगा।

मार्ग में जो आयेगा शूल,
पुष्प ही बन जायेगा।
मन में जब तु ठानेगा,
तो हर आफत मिटा जायेगा।

मेहनत कडी करेगा और 
दिन-रात एक कर जायेगा।
मन में जब तु ठानेगा,
तो मंजिल अपनी पा जायेगा।

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