मेरी परिभाषा - by Sandhya Rathi
मेरी परिभाषा
नहीं बनना मुझे कृष्ण की राधा और
ना ही सह पाऊँगी रुक्मिणी की पीड़ा।
मत करो मुझ पर कोई भी समीक्षा,
नहीं दे पाऊँगी सीता जैसी अग्नि परीक्षा।
मत लिखो मुझ पर कोई भी कथा,
नहीं सह पाऊँगी उर्मिला की व्यथा।
मीरा जैसी भक्ति भी नहीं कर पाऊँगी,
मन में इतना वैराग्य कहाँ से लाऊँगी?
ना अनुगामिनी बन कर खुश रहुँगी,
ना ही तुमसे आगे चलना चाहूँगी।
मैं नारी हुँ, नहीं बनना मुझे कोई अवतार,
मुझे बनना है सहगामिनी चलना है तुम्हारे साथ।
मैं भी इंसान ही हुँ मत बनाओ मुझे महान,
करने दो मुझे गलतियाँ, मत गिनवाओ मेरे काम।
नहीं चाहिए मुझे देवी जैसा मान सम्मान
खुश रह लूँगी, बस मत छीनना मेरा स्वाभिमान।


No comments