भक्ति - by Chanrej Ram Ambuj


भक्ति


भक्ति करो तुम  ईश की,  दरस मिले जगदीश।

मात पिता की भक्ति को, करो नवा कर शीश।।


गंगा  अरु गो  मात को, पूज  नवा कर माथ।

प्रातः  सायं  सूर्य  को, नमन  जोड़ कर  हाथ।।


हे  प्रभु  मेरी  लेखनी, चले  दिवा  औ   रात।

गुण मैं लिख दूँ आपके,थके नहीं मम  गात।।


जय जगपालक जग जनक,जय जय हे जगदीश।

होकर   जग   में   अवतरित,  पीर  हरो  हे  ईश।।


भक्ति दीप मन मे जला,अन्तस करो उजास।

क्षीर  सिन्धु  से  आ रहे, नारायण  तव पास।।


मानी मानव मान जा,    करो नहीं तुम पाप।

भागी   होगे   दंड के,   मानोगे   तुम   आप।। 


मन की गठरी खोल के, करो ईश की भक्ति।

ईश्वर  खुश  हो  जायँगे,  देंगे  तुमको  शक्ति।।


जोड़ घटाना भाग में,  जीवन बीता जाय।

हाथ पसारे जात हैं,अन्त समय जो आय।।


कौड़ी कौड़ी जोड़कर, सम्पति लिया बनाय।

सुख के साधन सब यहीं अन्त समय रह जाय।।

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