गाँव की यादें - by Punit Satyam


गाँव की यादें


याद बहुत आता है साथी 

मुझको मेरा गाँव ।


ऊँची-ऊँची खड़ी इमारत

दिखती हैं हर ओर ।

कानों में भी गूँज रहा है

मशीनरी का शोर । 


नहीं कूकती कू,कू कोयल

और न कौवे काँव ।

याद बहुत आता है साथी 

मुझको मेरा गाँव ।


मिली कड़क गर्मी से राहत

जल रिमझिम बरसा ।

इंद्रधनुष को देख अचानक

मेरा मन हरसा ।


नहीं चलाते दिखते बच्चे

कागज वाली नाव ।

याद बहुत आता है साथी

मुझको मेरा गाँव ।


प्राणवायु पानी की किल्ल्त

हवा प्रदूषित फैली ।

कभी-कभी अनुभव करता हूँ

असहज जीवन शैली ।


पेंड़ उगे गमले के अंदर

ना है ठण्डी छाँव ।

याद बहुत आता है साथी 

मुझको मेरा गाँव ।

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