कर्तव्य-पथ - by Swayam Prabha Mishra
कर्तव्य-पथ
जीवन कर्तव्य और कष्ट भरा,
इसका गम मत लाना।
दायित्व निभाना होगा,
पथ में कहीं जम मत जाना।
निस्तब्ध निशा नैराश्य करे,
शिथिल हो गई काया।
बोझिल सांसें जब साथ न दें,
पर हरदम चलते जाना।
मैं का अहम भुला न सके,
अपनें को ही रब माना।
आई पारी जब चलने की,
मिथ्या का ये तम जाना।
उम्मीद नहीं करना कोई,
हमदर्द का मिले सहारा।
खुद ही ये पथ प्रशस्त करना,
हमदम अपना बन जाना।
दुर्लभ है ये मानव जीवन,
तिरष्कृत न होनें पाए ।
सत्कर्म ही संग में जायेगा,
छोड़ अहम सब जाना ।


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