वैक्सिन - by Deepak Sharma
वैक्सिन
हम को हरा सके कोरोना में कहाँ है दम ।
गर दो गज की दूरी और मास्क में है हम ।।
जिंदगी हँसते मुस्कुराते हुए जी लो ।
भाप लो और उबला पानी पी लो ।।
सियासत की नाकामियों पर क्या है रोना ।
हमें तो बस बार - बार हाथ हैं धोना ।।
आज रहे दूर तो, कल जरूर मिलेगें ।
प्राणायम हम सुबह शाम करेगें ।।
जिंदगी की जंग भी हम जीत जाएँगे ।
अगर ये कदम घर में ही थम जाएँगे ।।
आओ आशा का ‘’दीपक’’ जलाएँ ।
वैक्सिन हम सब जरूर लगवाएँ ।।


No comments