मोहब्बत भी दे दो - by Dr. Shaheda


मोहब्बत भी दे दो


दिलों मे  हमारे  इतनी मोहब्बत  भी दे दो

नेकियाँ हम करते रहें वो अज़मत भी दे दो


किसी के आँसुओं को अपने दामन मे ले लूँ

खुदारा  प्यार की   ऐसी  दौलत   भी  दे दो


काम आए ये जीवन हमारा  वतन के लिये

अपना तन मन लुटाने की आदत भी दे दो


भूखा जो भी है उसको दो रोटी खिला कर

उसके दुख को मिटाने की फ़ुर्सत भी दे दो


खत्म हो  ज़माने से वहशत का  नामो निशा

करम हो जाए सब पे,अपनी रहमत भी दे दो


ये हसरत है कि दुनिया को खुशहाल देखे'शाहिद'

सभी के दुख बाँटने की मोहलत भी दे दो

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