प्रेरणा - by Chandan Keshri
प्रेरणा
संसार का कण-कण हमें,
पल-पल प्रेरणा देता है।
बस फर्क है नजरिए का,
जो जान लिया विजेता है।।
सागर की बहती धारा भी,
पल-पल ये बात सिखाती है।
बस आगे बढ़ते रहने की,
हमें प्रेरणा दे जाती है।।
काँटों के बीच खिलता गुलाब,
और कीचड़ में नीरज है।
तुम भी पुष्प बन महकोगे,
बस रखना मन में धीरज है।।
गर दुखों का साया है,
या अंधकार का डेरा है।
दिनकर से ले प्रेरणा,
होगा अवश्य सवेरा है।।
चींटी भी अपना बोझ,
स्वयं ही उठाती है।
आत्मनिर्भर बनने की,
हमें प्रेरणा दे जाती है।।
वृक्ष न कभी ग्रहण करता,
अपने मीठे फल।
निःस्वार्थ भाव से कर्म करेंगे,
होंगे तभी सफल।।


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