भगत सिंह की शहादत - by Surendra Sharma "Shiv"
भगत सिंह की शहादत
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर,
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
सुखदेव राजगुरु की कुर्बानी,
हम सबने सुनी है वो कहानी।
जब हुई भारत माता पर न्योछावर,
सरदार भगत सिंह की जवानी।।
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
जिस माता ने उन्हें जन्म दिया,
देश की खातिर उसको भी छोड़ दिया।
मच गया था अंग्रेजों में हड़कंप,
जब असेंबली में बम फोड़ दिया।।
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर,
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
उसकी वीरता और निडरता की,
लाहौर की वो जेल ही है गवाह।
मिले देश को आजादी जल्द,
थी उस वीर की बस यही चाह।।
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर,
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
वो हँसते-हँसते झूल गए फांसी पर,
पहना था उन्होंने बलिदानी चोला।
धन्य है जन्म देनेवाली माँ उनकी,
देखकर ये सारा हिंदुस्तान बोला।।
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर,
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
प्रेरणा है युवाओं की वो आज भी,
भगत सिंह ज़िंदा है हमारे दिलों में आज भी।
जब कभी बात होती है शहीदों की,
नाम उनका पहले लिया जाता है आज भी।।
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर,
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
फाँसी पर चढ़ा जब वो वीर,
भारत माता भी रोई होगी।
कुछ पल के लिए उसकी,
आँखें भी नम तो हुई होगी।।
कुर्बानी जिन्होंने दी है वतन पर
आज फक्र है हमें उन शहीदों पर।।
- सुरेंद्र शर्मा "शिव"
शिमला, हिमाचल प्रदेश
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