बढ़ते चलो - by Mukesh Negi


बढ़ते चलो

-

जुल्म के बवंडर से,

अब लड़ते चलो।

रुकना नहीं,

आगे को बढ़ते चलो।।


अपने साहस को नहीं,

अब नातवां करना है।

हर दुश्मन का तुम्हें,

अब खातमा करना है‌।।


लक्ष्य को भेदना है,

और तिरंगा फहराना है।

मातृभूमि का ऋण,

जो लिया चुकाना है।।


बाधाएँ उलझन नहीं,

ये तो परीक्षा की घड़ी है।

यहीं से शुरू जीवन की,

अब अगली कड़ी है।।


ऐ वतन के लाल,

तेरी शहीदी को सदा,

याद किया जाएगा।

ज़मीं खिल उठेगी,

आसमां आंसू बहाएगा।।


पापियों के रक्त से,

धरती को लाल करना है।

वतन के दुश्मनों का,

बुरा हाल करना है।।


वतन के गीत गाते हुए,

मंजिल में चढ़ते चलो।

रुकना नही,

आगे को बढ़ते चलो।।



- मुकेश नेगी

देहरादून, उत्तराखंड

No comments

Powered by Blogger.