हे भारत के वीर शहीदों - by Prof. N. Shanti Kokila


हे भारत के वीर शहीदों


हे भारत के वीर शहीदों, तुमको राष्ट्र नमन करता है,

तुमने जो इतिहास रचा है, उसका अभिनन्दन करता है।

तुमने जो बलिदान दिया है, सीमाओं पर रक्त बहाकर,

सीने पर गोली खाई है, अपना अद्भुत शौर्य दिखाकर।

ऐसे वीर कहाँ धरती पर, जो शत्रु का मान मिटा दें,

मातृभूमि की रक्षा में जो, तन-मन-धन सर्वस्व लुटा दें।

जीवन का इतिहास तुम्हारा, सुरभित चन्दन वन लगता है।


अमर रहेगा शौर्य तुम्हारा, जब तक गंगा में पानी है,

यश गाथा गूँजेगी घर-घर, जब तक धरती पर प्राणी है।

राष्ट्र हुआ कृतज्ञ तुम्हारा, तुमने गौरव मान बढ़ाया,

मातृभूमि की बलिवेदी पर, हँस कर अपना शीश चढ़ाया।

चिता जली है जहाँ तुम्हारी, गगन पुष्प वर्षा करता है।

मातृभूमि पर मिटना है बस, अन्य कोई अरमान नहीं है,

तुम भारत माँ के सैनिक हो, अन्य कोई पहचान नहीं है।

मरना तो है नियति सभी की, लेकिन ऐसी मौत कहाँ है,

यश की ऐसी कभी न बुझने वाली उज्ज्वल ज्योति कहाँ है।

मरने को तो नित्य धरा पर, तम तांडव नृतन करता है।


रोती माता पत्नी छोड़ी, नन्हें मुन्नों की किलकारी,

घर आँगन की सुख सुविधाएँ, युद्धभूमि के लिये बिसारी।

पत्नी की चिट्ठी को तुमने, आँसू पीकर बाँच लिया था,

वृद्ध पिता की सूनी आँखों, तक न जाना जाँच लिया था।

शव को देख तुम्हारे जन-जन, रो-रो कर क्रन्दन करता है।

सीमा की ऊँची चोटी पर, गाड़ तिरंगा फहराया है,

दुश्मन को उसकी सीमा तक, मार-मार कर पहुँचाया है।


नहीं वीरता ऐसी देखी, युद्ध हुए हैं बहुत धरा पर,

भारत जैसे वीर नहीं हैं, किसी देश में वसुन्धरा पर।

शौर्य पताका लिए तुम्हारी सौरभ विश्व भ्रमण करता है,

है भारत के वीर शहीदों, तुमको राष्ट्र नमन करता है।


- प्रो० एन० शान्ति कोकिला

बेंगलूरु, कर्नाटक

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