धन्य है भारतभूमि - by Dr. Rajkumar Shandilya
धन्य है भारतभूमि
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पुण्यभूमि से विश्व में फैला, वेदों का ज्ञान
मार्गदर्शक, विश्व गुरु मेरा भारत महान।
शकुंतला-दुष्यंत के पुत्र भरत महान
विख्यात उसी से भारत, है विश्व में शान।
ऋषि-मुनियों, संतों की अमृत वाणी कल्याणी
धैर्य से सत्य, अहिंसा के पथ पर ले जाती।
धर्म यहाँ दया, सेवा, परोपकार सिखाता
सदा त्यागपूर्ण उपभोग का पाठ पढ़ाता।
उषा काल में हिमालय के शिखर सुनहरी
दोपहर में वही श्वेत चांदी सा चमकें।
कल-कल करते झरने, निर्मल जल
भक्तिमय शिवार्चन से हो जीवन सफल।
दुर्लभ जड़ी बूटियों से है जीवन मिलता
शुद्ध, शीतल जल और वायु से मन खिलता।
शीतल जल माँ गंगा, करे पतित-उद्धार
तटों पर उर्वरा भूमि और होता व्यापार।
धन्य धरा यह, बसें यहाँ प्रभु कृष्ण-राम
ज्योतिर्लिंग, शक्तिपीठ और यहाँ चार धाम।
पावन नदियाँ, पर्वत, मोहक प्रभु धाम
एकता सूत्र में बंधा, भारत जिसका नाम।
भारतवासी विश्व को बंधुत्व का दें सन्देश
बुद्धि बल से बढ़े, यशस्वी बनें, न हो क्लेश।
- डॉ० राजकुमार शांडिल्य


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