फौजी - by Sanket Singh
फौजी
अपने वीर जवानों के लिए,
चलो एक पैगाम लिखते हैं।
फिर हवाओं के जरिए उसे,
हम सरहद तक पहुंचाते हैं।।
वही जो वतन के लिए,
दिन - रात डट जाते हैं।
विषम परिस्थितियों में भी,
मजबूत हौसला दिखाते हैं।।
वतन के रखवाले वो,
बेखौफ होकर चलते हैं।
दुश्मन चाहे कोई भी हो,
एक-एक का सीना चीरते हैं।।
हर माताओं का बेटा यह,
एक-एक बहना का भाई है।
इन्हीं से है ईद में बरकत,
इनसे ही है दीवाली में रौनक।।
समूचे हिंदुस्तानियों के लिए,
ये कितनी इच्छाएँ त्यागते हैं।
कहाँ मिल पाएँगे सूरमा ऐसे,
जो मरकर भी अमर हो जाते हैं।।
मातृभूमि की रक्षा के लिए,
यह हर पल चौकस रहते हैं।
हृदय कोमल है इनका भी,
पर फौलादी कहलाते हैं।।
सरहद ही इनका घर है,
रक्षा करना इनका धर्म है।
तो क्यों न दें सम्मान हम,
अगर ये हैं तो ही हम हैं।।
अपने इस वतन के लिए,
जिन्होंने जान न्योछावर किया।
सभी भारत माँ के नंदन हैं,
आज हम सभी भारतवासी का,
उन सभी वीरों को अभिनंदन है।।


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