हम सब हिन्दुस्तानी हैं - by Krishna Kant Badoni
हम सब हिन्दुस्तानी हैं
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ऋषि-मुनियों की पावन धरती,
संस्कृति हमारी सबसे पुरानी है।
अलग-अलग जाति-धर्म हमारे,
लेकिन हम सब हिन्दुस्तानी हैं।।
मिल-जुल कर रहते सब प्रेम से,
दुनिया में न इनका कोई सानी है।
अहिंसा के सिद्धांतों पर चलकर,
प्रेम की भाषा हमने पहचानी है।।
कर्तव्य पथ पर चलने के सिवाय,
रही हमारी हर राहें अनजानी हैं।
अडिग पर्वत बन दुश्मन को रौंदा,
अपने देश को हमने दी कुर्बानी है।।
भगत सिंह, आजाद जैसे वीरों के,
रंगी खून से भूमि यह बलिदानी है।
यह मिट्टी हमको है प्राणों से प्यारी,
यहाँ पाँव धरे जो उसकी नादानी है।।
स्वरचित एवं अप्रकाशित
- कृष्ण कान्त बडोनी
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश


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