सब कुछ न्योछावर है - by Sumit Singh "Pawar"
सब कुछ न्योछावर है
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अक्सर नाज कर बैठता हूँ अपनी पोशाक पर,
कभी दिल से, कभी मन से इसके अभिमान पर,
रेत की दुनिया में पानी सा दिल लिये फिरता हूँ।
सब कुछ न्योछावर है इसकी शान पर....
लोग बोलते बहुत हैं,
कुछ झेलते हैं,कुछ तौलते बहुत हैं,
और अपने वजूद से डोलते बहुत हैं,
लगातार ध्यान देते बस स्व-गुणगान पर,
रेत की दुनिया में पानी सा दिल लिये फिरता हूँ।
सब कुछ न्योछावर है इसकी शान पर....
वर्दी की अहमियत वर्दी वाला जाने,
इसकी खूबसूरती को जग पहचाने,
मेहनत और त्याग हैं इसके अफसाने,
बहुत अंकुश लगाना होता है अरमान पर,
रेत की दुनिया में पानी सा दिल लिये फिरता हूँ।
सब कुछ न्योछावर है इसकी शान पर....
अपनों से दूर हूँ इसकी आस्था के लिए,
तैयार हूँ हर वक्त, हर आपदा के लिए,
बहुत कुछ छोडे़ बैठा हूँ इसकी प्रतिष्ठा के लिये,
और जो अपने हैं, उन्हें भी गर्व है मेरे चरित्र और आवाज पर,
रेत की दुनिया में पानी सा दिल लिये फिरता हूँ।
सब कुछ न्योछावर है इसकी शान पर....
- सुमित सिंह "पवार"
आगरा, उत्तर प्रदेश


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