आओ, तिरंगे से प्यार करें - by Tulsiram 'Rajasthani'
आओ, तिरंगे से प्यार करें
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प्रेम और सद्भाव द्वारा,
खुशियों का संसार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
ये आजादी मुश्किल से पाई,
जाने कितनों ने जान गंवाई।
विश्वपटल पे भारत माँ की,
फिर से जय-जयकार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई,
हम सब जन हैं भाई-भाई।
धर्म केवल इंसनियत वाला,
हम सब अंगीकार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
जात-पांत का भेद मिटाएँ,
ऊँच-नीच को दूर भगाएँ।
अपना-पराया नहीं जानकर,
आपस में व्यवहार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
गम को कोसों दूर भगाएँ,
साथ-साथ सब कदम बढ़ाएँ।
चाहे दुख हो चाहे सुख हो,
मिलजुल कर बंटवार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
दीन-दुखियों को गले लगाएँ,
गिरे हुए को फिर से उठाएँ।
हर दिल में अरमान जगा,
जन-जन को रिश्तेदार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
हमनें दुनिया को राह दिखाई,
हमने ही प्रीत की रीत सिखाई।
वसुधैव कुटुम्बकम भावना का,
राष्ट्र-राष्ट्र प्रचार करें।
आओ, तिरंगे से प्यार करें।।
- तुलसीराम 'राजस्थानी'


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