वतन से प्यार - Bhashkar Budakoti "Nirjhar"


वतन से प्यार

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करे समर्पित जो सदा, तन मन धन लहु धार। 

है जीवन उसका सफल, जिसे वतन से प्यार।।


वही  जिंदगी  काम की,  करे  नही  जो  घात।

वतन प्रेम की भावना,  जिसके  उर दिन-रात।। 

कर न्यौछावर प्राण निज, सदा वतन के नाम।

है मन  सुंदर  सा वही, जो  आए  जन  काम।। 


वतन  सुरक्षा  के  लिए,  लिए  हाथ  तलवार।

है जीवन उसका सफल, जिसे वतन से प्यार।।


बलिदानी  जो  देश  में,  वही  वतन के लाल।

करे नाश नित शत्रु के, विफल करे सब चाल।। 

बाँध कफन सिर पर सदा, चले वतन के वीर।

सहते खुद दुख को कभी,  हरें  सभी के पीर।। 


कहें  उसे  ही  श्रेष्ठ  नित,  खेले   जो  अंगार।

है जीवन उसका सफल, जिसे वतन से प्यार।।


दुश्मन  के छक्के  छुड़ा,  करते  जो  उद्घोष।

थाम  तिरंगा  हाथ  में,   मिले  सदा  संतोष।। 

करे वतन से गर्व अब,  रखें  वतन  का मान।

रचें  सदा  इतिहास  को,  भारत  के  संतान।।


भाईचारा    हो   सदा,    करें   नहीं   तकरार।

है जीवन उसका सफल, जिसे वतन से प्यार।।


- भाष्कर बुड़ाकोटी "निर्झर"

पुंडेरगाँव (उत्तराखण्ड)

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