मेरा वतन - by Madhuri Verma


मेरा वतन

-

ऐ मेरे वतन ! तुझको मेरा प्रणाम है ।

भारत हमारी मातृभूमि, भारत हमारी शान है ।

सिरमौर सा खड़ा हिमालय, पग सिंधु प्रक्षाल रहे हैं ।

यह कश्मीर है हमारा और यह सिंध का किनारा,

वो धरती का अन्तिम छोर, जहां सागर ले रहा हिलोर ,

कश्मीर से कन्याकुमारी तक इसका सौन्दर्य ललाम है ।

भारत हमारी मातृभूमि, भारत हमारी शान है ।

ऐ मेरे वतन ! तुझको मेरा प्रणाम है ।

जन्में यहाँ पर राम कृष्ण, जन्मीं यहीं पर सीता ।

रचे गए वेद पुराण यहाँ, रची गई यहीं पर गीता।

ऋषि मुनियों की ये धरती, तप योग से सजी है।

अध्यात्म का तो यह धाम है ।

ऐ मेरे वतन ! तुझको मेरा प्रणाम है ।

धर्म और संस्कृति में हैं हम पहली क़तार पर ,

दर्शन चिन्तन की तो बात न पूछो ,

गौतम बुद्ध का जग में प्रसिद्ध नाम है ।

वीरों की जननी हिन्द की यह धरती है ।

जन्में यहाँ पर राणा प्रताप और वीर शिवा ,

गांधी,सुभाष,नेहरू,पटेल,चन्द्रशेखर और भगत सिंह।

अगणित सेनानियों के नाम है ।

ऐ मेरे वतन ! तुझको मेरा प्रणाम है ।

हर युग में जन्में मातृभूमि पर मर मिटने वाले ।

सीमा पर खड़े हैं अनन्त अनवरत प्रहरी,

अनगिनत शहीद हुए, असंख्य हथेली पर लिए जान हैं ।

वीरांगनाओं से भरी है हिन्द गाथा ,

लक्ष्मीबाई तो हमारे भारत की शान हैं ।

इस देश की पावन मिट्टी पर पलने का मुझे बड़ा अभिमान है ।

ऐ मेरे वतन ! तुझको मेरा प्रणाम है ।


- माधुरी वर्मा

वाराणसी, उत्तर प्रदेश

No comments

Powered by Blogger.